Thu 24दिन 23

1:12

यह सिर्फ़ उदाहरण है। अपने दिन गिनने के लिए टैप करो।

तुम दोनों के बीच आख़िरी बार संपर्क कब हुआ था?

सिर्फ़ इस पेज पर। कुछ भी सेव नहीं होता।

फिर बात करने का मन है

nocnt गिनता है कि एक्स से आख़िरी बार संपर्क हुए कितने दिन हो गए।

जब उन्हें मैसेज करने का मन हो, तो पहले nocnt खोलो। देखो कितना समय बीत गया, बात बंद करने की अपनी वजहें सँभालकर रखो, और बिना मैसेज भेजे उस इच्छा को गुज़र जाने दो।

होम स्क्रीन और लॉक स्क्रीन पर तुम्हारी गिनती।
विजेट दिखाते हैं कि तुम्हारा कौन-सा दिन चल रहा है और अगला पड़ाव कितना पास है।
उनकी प्रोफ़ाइल चेक कर ली? दर्ज कर लो।
इससे तुम्हारे दिनों की गिनती नहीं टूटेगी।
चूक हो गई? पहले दिन से फिर शुरू करो।
पिछले दिन इतिहास में बने रहेंगे। वह समय बेकार नहीं गया।
ठीक उसी पल के लिए मदद।
लिखकर जला दो, साँस लो, बबल रैप फोड़ो या कुछ बर्तन तोड़ डालो।
रिमाइंडर सिर्फ़ पड़ाव वाले दिनों पर।
3, 7, 14, 30, 60, 90, 180 और 365। इसके अलावा कुछ नहीं।
यह तुम्हारे अकाउंट से दूर रहता है।
nocnt तुम्हारे अकाउंट, फ़ोटो या चैट को कभी नहीं छूता।
App Store से nocnt डाउनलोड करोमुफ़्त डाउनलोड · iPhone

शुरुआती महीने अक्सर कैसे होते हैं

आमतौर पर बताए गए अनुभवों पर आधारित। यह चिकित्सकीय सलाह नहीं है।

  1. दिन 1–3

    शुरुआत के कुछ दिन अक्सर सबसे मुश्किल होते हैं।

    इन दिनों मैसेज करने की इच्छा आमतौर पर सबसे तेज़ होती है। एक बार उठी इच्छा अक्सर कुछ ही मिनटों में गुज़र जाती है, लेकिन ये शुरुआती दिन फिर भी मुश्किल होते हैं: फ़ोन हर वक़्त पास रहता है, और ख़ालीपन भरने के लिए अभी कुछ और नहीं होता।

    आमतौर पर क्या काम आता है: उनकी पोस्ट म्यूट कर दो या चैट नज़रों से हटा दो। जो भी चीज़ मैसेज करने से पहले तुम्हें एक पल के लिए रोक दे, वह मदद करती है।

  2. दिन 4–14

    दिन आसान होने लगते हैं। शामें अब भी मुश्किल होती हैं।

    दिन का ज़्यादातर हिस्सा उनके बारे में सोचे बिना गुज़रने लगता है। शामें ज़्यादा भारी होती हैं: करने को कम होता है, और मन में पूरे दिन की वे बातें जमा होती हैं जो उन्हें बतानी थीं।

    आमतौर पर क्या काम आता है: जब तक मन साफ़ है, अपनी वजहें लिख लो। जब संपर्क करने का मन हो, उन्हें फिर से पढ़ो।

  3. दिन 15–30

    दर्द कम होने लगता है। तभी दबे पाँव शक आता है।

    एक ख़याल आता है: इतना बुरा भी नहीं था। यादें सबसे बुरे हिस्सों को सबसे पहले धुंधला कर देती हैं। अक्सर इसी वक़्त लगने लगता है कि संपर्क करने में कोई हर्ज नहीं। किसी संकट में नहीं, बल्कि किसी आम-सी शाम को, जब लगता है कि एक मैसेज से कुछ नहीं बदलेगा।

    आमतौर पर क्या काम आता है: शुरुआत में जो लिखा था, उसे फिर से पढ़ो। तब तुम्हें अपनी वजहें ज़्यादा साफ़ दिख रही थीं।

  4. दिन 31–90

    अब सबसे पहले उनका ख़याल नहीं आता।

    कुछ होता है, और तुम्हें एहसास होता है कि उन्हें बताने के लिए तुमने फ़ोन नहीं उठाया। यादें रहती हैं, लेकिन अब उतनी चुभती नहीं। इस दौर में एक-दो बुरे दिन आने का मतलब पीछे लौटना नहीं है।

    आमतौर पर क्या काम आता है: अगर उनकी फ़ोटो या पुरानी चैट अब भी तुम्हें पीछे खींचती हैं, तो उन्हें कुछ समय के लिए नज़रों से दूर कर दो।

  5. दिन 91 से आगे

    बिना संपर्क के रहना अब आम लगने लगता है।

    कुछ महीनों बाद उनसे संपर्क करने का ख़याल धीरे-धीरे कम आने लगता है। तुम ऐप रोज़ खोलो या कभी-कभार, दिन गिने जाते रहेंगे।

    आमतौर पर क्या काम आता है: जब मदद चाहिए, ऐप खोल लो। कुछ समय के लिए इसे भूल जाना भी ठीक है।

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